डोंगरगाँव। जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम दर्री और बेन्दरकट्टा में 10-10 लाख रुपये की लागत से बने नवनिर्मित यात्री प्रतीक्षालय अब जनता की सुविधा से ज्यादा राजनीतिक खींचतान का केंद्र बन गए हैं। साइनबोर्ड पर फोटो लगाने को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ है कि मामला अब खुली राजनीतिक जंग में तब्दील होता नजर आ रहा है।
अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण मद से स्वीकृत इन निर्माण कार्यों के साइनबोर्ड में प्रधानमंत्री और केंद्रीय नेतृत्व को प्रमुखता दी गई है। साथ ही सांसद संतोष पाण्डेय की तस्वीर को स्थान मिला है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों में केवल जिला पंचायत सदस्य जागृति यदु और स्थानीय सरपंच को ही जगह दी गई है।
विधायक और जनपद अध्यक्ष गायब
सवाल यह उठ रहा है कि आखिर स्थानीय विधायक दलेश्वर साहू, जनपद पंचायत अध्यक्ष रंजिता पड़ौती और जनपद सदस्य हरिला साहू को साइनबोर्ड से क्यों नदारद रखा गया? क्या यह महज चूक है या फिर सोची-समझी राजनीतिक रणनीति?
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि सत्तापक्ष से जुड़े जनप्रतिनिधियों की तस्वीरों से परहेज कर प्रोटोकॉल की खुलेआम अनदेखी की गई है। जबकि प्रोटोकॉल के तहत क्षेत्रीय विधायक और जनपद अध्यक्ष को प्रमुखता मिलना स्वाभाविक माना जाता है।
“विधायक के सम्मान की अनदेखी बर्दाश्त नहीं”
ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष टिकेश साहू ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विधायक के सम्मान की अनदेखी अनुचित है और निर्माणकर्ता एजेंसी के खिलाफ शिकायत की जाएगी। उनका आरोप है कि विकास कार्यों में जिनकी भूमिका रही, उन्हें ही साइनबोर्ड से गायब कर दिया गया।
वहीं जनपद अध्यक्ष रंजिता पड़ौती ने दो टूक कहा कि शीर्ष जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल का ध्यान रखा जाना चाहिए, अन्यथा उच्चस्तरीय शिकायत की जाएगी।
सियासत गरम, विवाद गहराने के आसार
निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत होने के कारण सरपंच की तस्वीर लगना स्वाभाविक बताया जा रहा है, लेकिन बड़े जनप्रतिनिधियों को नजरअंदाज करना अब राजनीतिक विवाद का कारण बन चुका है। क्षेत्र की सियासी फिजा में गर्माहट साफ महसूस की जा रही है।
अब देखना यह है कि यह मामला केवल शिकायत तक सीमित रहता है या फिर आने वाले दिनों में यह साइनबोर्ड की लड़ाई बड़े राजनीतिक टकराव का रूप ले लेती है। फिलहाल यात्री प्रतीक्षालय कम, सियासत ज्यादा चर्चा में है।

