रायपुर। टैगोर नगर स्थित पटवा भवन में चल रहे पर्युषण पर्व के तीसरे दिन उपाध्याय मनीष सागरजी महाराज ने कहा कि क्रोध न करना सबसे बड़ी तपस्या है और मान को त्यागना साधना की पहली सीढ़ी है। उन्होंने कहा कि जीवन में क्षमा मांगने और क्षमा करने का इंतजार नहीं करना चाहिए।
महाराजश्री ने कहा कि संवत्सरी प्रतिक्रमण तक प्रतीक्षा न करें, बैर मिटाने की शुरुआत पहले दिन से करें। प्रतिदिन द्रव्य और भाव से पूजा करने की बात कहते हुए उन्होंने अनुशासन और आत्मकल्याण पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि चातुर्मास का हर दिन मूल्यवान है और आत्मकल्याण के लिए इन आठ दिनों को समर्पित करना चाहिए। कल्पसूत्र वाचन को आत्मशुद्धि का मार्ग बताते हुए कहा कि इसे समर्पण भाव से सुनना चाहिए।
31 अगस्त से दादा गुरु इकतीसा पाठ
चातुर्मास समिति अध्यक्ष श्यामसुंदर बैदमुथा ने बताया कि 21 दिवसीय दादा गुरु इकतीसा पाठ 31 अगस्त से प्रारंभ होगा। प्रवचन सुबह 8:15 से 10:00 तक व दोपहर 1:30 बजे भगवान का जन्मवाचन होगा। कार्यक्रम में विभिन्न श्रद्धालु परिवारों को पुण्य लाभ प्राप्त हुआ।

