राजिम का त्रिवेणी संगम 15 दिनों तक आस्था, संस्कृति और लोक परंपरा का केंद्र बना रहा। 14 दिनों से चल रहे राजिम कुंभ कल्प मेले का 15 फरवरी को भव्य और ऐतिहासिक समापन होगा। इस बार मेला श्रद्धालुओं की अभूतपूर्व सहभागिता, संतों के भव्य सानिध्य और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्यता के कारण विशेष रूप से यादगार रहा।
मेला अवधि में हजारों श्रद्धालुओं ने महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के संगम में पुण्य स्नान किया। साधु-संतों के प्रवचन, यज्ञ-हवन और अखंड भजन-कीर्तन से वातावरण भक्तिमय रहा। प्राचीन राजीव लोचन और कुलेश्वर महादेव मंदिरों में दर्शनार्थियों की कतारें लगी रहीं।
सांस्कृतिक मंच पर छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य, पंथी, राउत नाचा, भक्ति संध्या और लोकप्रिय गायकों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का मन मोह लिया। महिला स्व-सहायता समूहों को मेला आर्थिक और सृजनात्मक रूप से सशक्त बनाने का अवसर मिला। प्रशासन द्वारा सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य और यातायात की व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गईं।
15 फरवरी, महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर विशेष पूजन, संतों के आशीर्वचन और भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मेले का समापन होगा। श्रद्धालु प्रातः काल संगम में पुण्य स्नान करेंगे, जबकि नागा साधु-सन्यासियों का शाही जुलूस कुंभ की आध्यात्मिक गरिमा को चरम पर ले जाएगा।
