डोंगरगांव अस्पताल में नशे में धुत युवक ने मचाया उत्पात, पुलिस की लापरवाही पर उठे सवाल

डोंगरगांव : डोंगरगांव के सरकारी अस्पताल में सोमवार उस वक्त अफरा-तफरी मच गई जब डायल 112 की पुलिस टीम द्वारा लाया गया एक युवक नशे की हालत में अस्पताल स्टाफ और मरीजों पर खून उड़ाने लगा। युवक के सिर और हाथ से खून बह रहा था, जिसे प्राथमिक उपचार हेतु अस्पताल लाया गया था। लेकिन हैरानी की बात यह रही कि डायल 112 की टीम उसे अस्पताल में छोड़कर वापस लौट गई।
बीएमओ डॉ. रागिनी चंद्रे से प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवक अत्यधिक नशे सिर्फमें था। ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सकों ने खून साफ कर पट्टी की, लेकिन उपचार के कुछ देर बाद ही युवक ने पट्टियाँ खोल दी और हाथ से बह रहे खून को अस्पताल स्टाफ पर छिड़कने लगा। उसने नर्सों, डॉक्टरों और मरीजों के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया और पूरे अस्पताल परिसर में घूम-घूमकर गाली-गलौच और तोड़ फोड़ करने लगा। इस दौरान अस्पताल कर्मचारियों ने कई बार स्थानीय पुलिस को फोन कर मदद मांगी, लेकिन लगभग एक घंटे तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अंततः बीएमओ को खुद एसडीएम डोंगरगांव को कॉल करना पड़ा, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।
पूरे घटनाक्रम की रिकॉर्डिंग अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों और कर्मचारियों के मोबाइल फोन में मौजूद है। अस्पताल प्रबंधन ने इस मामले में पुलिस को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा है। उनका कहना है कि अस्पताल परिसर में न कोई सुरक्षा व्यवस्था है, न ही पुलिस समय पर उपलब्ध होती है। यदि युवक ने अस्पताल में मौजूद किसी भारी वस्तु से हमला कर दिया होता, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था। सबसे गंभीर सवाल यह उठता है कि जब डायल 112 की टीम को युवक की नशे की हालत का स्पष्ट अंदाज़ा था, तब उसे अस्पताल में अकेला छोड़कर जाना कहाँ तक उचित था? पुलिस की यह लापरवाही अस्पताल की सुरक्षा और कर्मचारियों की जान जोखिम में डालने जैसा है।
इसके अलावा, कई बार कॉल करने के बावजूद पुलिस का मौके पर न पहुँचना भी कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगाता है। यह न आम नागरिकों में बल्कि चिकित्सा व्यवस्था में लगे फ्रंटलाइन वर्कर्स के मन में भी असुरक्षा की भावना पैदा करता है। फिलहाल, अस्पताल प्रशासन युवक पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहा है और पुलिस विभाग की कार्यशैली की निष्पक्ष जाँच की भी अपेक्षा की जा रही है।