रायपुर। टैगोर नगर पटवा भवन में पर्वाधिराज पर्युषण पर्व के पांचवें दिन उपाध्याय भगवंत मनीष सागरजी महाराज ने कहा कि जीवन में दूसरों को नहीं, अपने कर्मों को जीतना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि प्रभु महावीर के जीवन को कल्पना नहीं, सत्य मानकर आत्मसात करें और अपने भीतर के महावीर को जागृत करें।
उन्होंने कहा कि संयमित जीवन ही आनंदमय जीवन है। द्रव्य साधना के साथ भाव साधना करें। प्रभु महावीर क्षमा, वैराग्य और सत्य के प्रतीक हैं। श्रद्धा से ही आत्मविकास संभव है।
विवेकानंद नगर स्थित ज्ञान वल्लभ उपाश्रय में महावीर जन्म कल्याणक का उल्लासपूर्वक वाचन किया गया। माता त्रिशला के स्वप्नों को माला पहनाई गई और भगवान के पालने को झुलाने का लाभ दीपक निमाणी परिवार को मिला। रात्रि में भक्ति संध्या आयोजित हुई।
