गुरु पूर्णिमा महोत्सव : कंसेलापाठ में भक्ति और श्रद्धा का अनुपम संगम

शिष्यों और ग्रामवासियों ने आत्मानुभूति, राष्ट्रधर्म और सनातन मूल्यों को किया आत्मसात

साल्हेवारा । ग्राम कंसेलापाठ स्थित शिव मंदिर एवं माता भगवती मंदिर परिसर में इस वर्ष गुरु पूर्णिमा महोत्सव आध्यात्मिक उल्लास, श्रद्धा और भक्ति के साथ धूमधाम से सम्पन्न हुआ। समूचा वातावरण गुरुवाणी, मंत्रोच्चार और साधना भाव से अभिभूत नजर आया।

इस पावन अवसर पर पंडित श्री सूरज उपाध्याय जी ने अपनी धर्मपत्नी के साथ सर्वप्रथम अपने पूज्य गुरुदेव जगद्गुरु शंकराचार्य पूज्यपाद स्वामी निश्चलानंद सरस्वती जी महाराज की छवि का विधिवत पूजन और वंदन किया। इसके पश्चात उनके शिष्यों द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार सामूहिक गुरुपूजन संपन्न हुआ।

पूजन उपरांत श्री उपाध्याय जी ने उपस्थित शिष्यगणों एवं ग्रामवासियों को आत्मानुभूति की दिशा में साधना, सनातन धर्म के शाश्वत सिद्धांतों, राष्ट्रधर्म तथा व्यवहारिक अध्यात्म के विविध आयामों पर अत्यंत सारगर्भित मार्गदर्शन प्रदान किया। उन्होंने जीवन में गुरु के महत्व और अध्यात्मिक साधना की भूमिका को सरल शब्दों में रेखांकित किया।

गुरुवाणी को शिष्यों एवं श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और एकाग्रता से श्रवण किया तथा उसे जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के समापन पर समस्त उपस्थितों के लिए भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें ग्रामवासियों और साधकों ने भक्ति भाव से भाग लिया।

इस भव्य आयोजन में कंसेलापाठ सहित आस-पास के वनांचल क्षेत्र के श्रद्धालुओं ने तन, मन और धन से सहभागिता निभाई। शिष्यगणों की सेवा, आयोजन की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की भागीदारी ने गुरु भक्ति की एक अनुपम मिसाल प्रस्तुत की।

गांव के बुजुर्गों का कहना था कि यह आयोजन न केवल आध्यात्मिक उन्नयन का माध्यम बना, बल्कि सामाजिक एकता और सनातन मूल्यों की पुनःस्थापना का सशक्त मंच भी सिद्ध हुआ।