छत्तीसगढ़ी भाषा-साहित्य को समर्पित “पुरखा के सूरत” संगोष्ठी, बिलासपुर में संपन्न

बिलासपुर। “मोर चिन्हारी छत्तीसगढ़ी” टीम द्वारा आयोजित “पुरखा के सूरत” संगोष्ठी में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने डॉ पालेश्वर प्रसाद शर्मा और सुरूज बाई खांडे के योगदान को याद करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को अपने पुरखों से प्रेरणा लेनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि डॉ शर्मा ने पहली छत्तीसगढ़ी शब्दकोश तैयार की और जीवनभर भाषा के लिए संघर्ष किया, वहीं सुरूज बाई खांडे ने भरथरी गायन के जरिए छत्तीसगढ़ी को देश-विदेश तक पहुंचाया।

अरुण साव ने छत्तीसगढ़ी को राजभाषा का दर्जा देने और नई शिक्षा नीति में मातृभाषा को स्थान दिलाने के लिए भाजपा सरकार की पहल की चर्चा की।

कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, विधायक धरमलाल कौशिक, कुलपति एडीएन वाजपेयी सहित कई साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे।