वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में खनिज सचिव पी. दयानंद ने कलेक्टरों को दिए सख्त निर्देश, कहा– रेत आपूर्ति रहे सुचारु, पर अवैध कारोबारियों पर नकेल जरूरी
रायपुर | प्रदेश में रेत के अवैध खनन और परिवहन पर अब खनिज विभाग ने मोर्चा खोल दिया है। बरसात के पहले निर्माण कार्यों में रुकावट न आए और अवैध कारोबार पर लगाम लगे, इसके लिए खनिज सचिव पी. दयानंद ने मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी प्रमुख जिलों के कलेक्टरों और खनिज अधिकारियों की क्लास ली। बैठक में उन्होंने दो टूक कहा कि अब लापरवाही बिल्कुल नहीं चलेगी और अवैध खनन में संलिप्त लोगों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई होनी चाहिए।
बैठक में खनिज संचालक रजत बंसल भी मौजूद रहे। अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देशित करते हुए सचिव दयानंद ने कहा कि रेत माफियाओं पर नकेल कसने के लिए जिलों में बनी टास्क फोर्स को और एक्टिव किया जाए। उन्होंने कहा कि खनिज राजस्व की हानि रोकना सरकार की प्राथमिकता है, इसलिए कार्रवाई में कोई कोताही न बरती जाए।
केवल स्वीकृत खदानों से होगी रेत की सप्लाई
सचिव ने यह भी साफ किया कि रेत खनन केवल उन्हीं खदानों से हो, जिन्हें वैध स्वीकृति मिली हो। अवैध स्रोतों से हो रही आपूर्ति की खबर मिलते ही कड़ी कार्रवाई की जाए। खनिज राजस्व की समय पर वसूली और पर्यावरणीय मानकों का भी सख्ती से पालन करने को कहा गया है।
ई-नीलामी से होगी रेत खदानों की नई व्यवस्था
अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि आने वाले तीन महीनों में ज्यादा से ज्यादा खदानें चिन्हांकित की जाएं और उनका आबंटन ई-नीलामी के जरिए किया जाए। पाँच हेक्टेयर से बड़ी खदानों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि रेत की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
भंडारण व्यवस्था पुख्ता करें, ताकि बरसात में न हो किल्लत
जुलाई से शुरू होने वाली खनन निषेध अवधि को देखते हुए, भंडारण की व्यवस्था भी समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सचिव ने कहा कि 10 जून से 15 अक्टूबर तक वैध भंडारण अनुज्ञप्तियों के जरिए रेत की आपूर्ति बनी रहनी चाहिए।
सरकारी योजनाओं के काम न रुकें, सिर्फ वैध स्रोतों से मिले रेत
प्रधानमंत्री आवास योजना समेत अन्य विकास कार्यों के लिए जरूरी रेत केवल अधिकृत खदानों से ही ली जाए, इस पर विशेष जोर दिया गया। सचिव ने यहां तक कहा कि खनिज अधिकारियों की गोपनीय चरित्रावली (CR) में रेत प्रबंधन के निर्देशों के पालन को एक अहम पैमाना बनाया जाएगा।
अब देखना यह है कि इन सख्त निर्देशों के बाद जिलों में अफसर कितनी तेजी से हरकत में आते हैं और रेत माफियाओं की पकड़ कितनी ढीली होती है।
