सोमनी में हर्षोल्लास से मनाया गया गणतंत्र दिवस

राजनांदगांव। ग्राम सोमनी में 26 जनवरी गणतंत्र दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शासकीय प्राथमिक शाला में प्रधान पाठक नरेश दुरूकर, शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाल सोमनी के प्राचार्य श्रीमती वीथिका साहू, शासकीय नवीन प्राथमिक शाला में प्रधान पाठिका श्रीमती अनुराधा गुरू, ग्राम पंचायत प्रांगण में सरपंच श्रीमती लता संतोष यादव, वृहत्ताकार सेवा सहकारी समिति प्रबंधक रीतेश शर्मा द्वारा ध्वजा रोहण किया गया। ध्वजा रोहण उपरांत प्राथमिक शाला, पूर्व माध्यमिक शाला एवं हायर सेकेंड्री के छात्र-छात्राओं ने राष्ट्रीय एकता के गगनभेदी नारों एवं बैंडवाजा के साथ प्रभातफेरी निकाली। शाला के छात्र-छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम, गीत, भाषण, कविता प्रस्तुत किया गया।
समारोह के मुख्य अतिथि सरपंच श्रीमती लता संतोष यादव, अध्यक्षता जिला पंचायत सदस्य.अंगेश्वर देशमुख थे। समारोह के विशिष्ट अतिथि टीएल चंद्राकर, कृष्णा तिवारी, रमन सिंह राजपूत, योगेन्द्र प्रताप सिंह, नेपाल साहू, उमेश कुमार साहू, रामदुलार साहू एवं सुकदेव साहू थे। अतिथियों का स्वागत पुष्पहार से शाला परिवार एवं छात्र-छात्राओं द्वारा किया गया। इस अवसर पर संस्था के प्राचार्य श्रीमती वीथिका साहू ने अपने संबोधन में कहां कि आज भारत अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। यानी हम लोग अब गणतंत्र के रूप में 76वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। 26 जनवरी को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया है। सबसे पहले मैं आपको बताना चाहती हूं कि गणतंत्र दिवस क्यों मनाया जाता है। दरअसल 15 अगस्त 1947 को भले ही देश आजाद हो गया था, लेकिन तब हमारे पास अपना संविधान नहीं था। आजादी के तीन साल बाद हमें अपना संविधान मिला। 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया था। इस दिन ही हमारे देश को अपना संविधान मिला था। संविधान के बिना कोई देश नहीं चल सकता। संविधान लागू होने के बाद हमारा देश भारत एक गणतंत्र देश बन गया। आज इसी ऐतिहासिक और शुभ दिन की 75वीं सालगिरह है। इस शुभ घड़ी पर मैं आप सभी को, देश और विदेश में रहने वाले सभी भारत के लोगों को हार्दिक बधाई देती हूं। आज हर नागरिक को भारत की गौरव गाथा पर गर्व का अनुभव होता है। आजादी के बाद हम भारतवासियों ने बेशुमार उपलब्धियां हासिल की है। आज इन्हीं उपलब्धियों का जश्न और उत्सव मनाने का दिन है। आज हमें देश को आजाद कराने वाले स्वतंत्रता सेनानियों और संविधान बनाने वाले महापुरूषों को भी नमन करना चाहिए। हम और हमारा देश, बाबासाहब डॉ. भीमराव अंबेडकर का सदैव ऋणी रहेगा, जिन्होंने संविधान निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जब हमारा देश आजाद हुआ तब ये भयंकर गरीबी व निरक्षरता के कुचक्र में फंसा हुआ था, लेकिन सात दशकों की मेहनत के बाद आज हमारा देश चांद पर पहुंच चुका है। परमाणु शक्ति संपन्न बन चुका हमारा देश विकसित देशों की लिस्ट में शामिल होने की दहलीज पर है। भारत दुनियां की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। कोविड-19 महामारी के दौरान पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को भी काफी क्षति पहुंची, लेकिन संघर्ष के दम पर हम बेहद कम समय में मंदी से बाहर आ गए और फिर से अपनी विकास यात्रा को शुरू किया। आज देश में समाज के कमजोर और हाशिये पर पड़े तबकों का जीवन स्तर ऊपर उठाने और मुख्य धारा में लाने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चल रही हैं। अनुसूचित जातियों, जनजातियों, महिलाओं, गरीबों, किसानों, मजदूरों के कल्याण के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत कई पीढ़ियों के लोग हमारे गणतंत्र की अब तक की विकास-गाथा में अमूल्य योगदान के लिए प्रशंसा के पात्र हैं। किसानों, मजदूरों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों और इंजीनियरों, पुलिसबलों की भूमिकाओं की सराहना करनी चाहिए। देश की प्रगति में योगदान देने वाले प्रत्येक नागरिक की सराहना करनी चाहिए। हमें देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले बहादुर जवानों, सैन्यकर्मियों को भी नहीं भूलना चाहिए, जो हमेशा किसी भी त्याग तथा बलिदान के तैयार रहते हैं। इनके जज्चे, शौर्य व हिम्मत को भी सलाम करना चाहिए। आज हमें अपराध, भ्रष्टाचार, हिंसा, नक्सलवाद, आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी, लिंग-भेद, अशिक्षा जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने का संकल्प लेना चाहिए। भारत को जब इस समस्याओं से बाहर नहीं निकालते तब तक स्वतंत्रता सेनानियों का सपना पूरा नहीं होगा। इसके अलावा अपने आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखकर हमें भारत सरकार के स्वच्छता अभियान
से भी जुड़ना चाहिए। जन कल्याण सामाजिक संस्थान के अध्यक्ष योगेन्द्र प्रताप सिंह ने कहा कि भारत आज गणतंत्र दिवस मना रहा है। साधारण भाषा में समझें तो आज के ही दिन भारत का संविधान अपनाया गया था और भारत गणतंत्र बना था। समारोह की बात करें तो गणतंत्र दिवस समरोह की शुरूआत में सबसे पहले प्रधानमंत्री अमर जवान ज्योति (इंडिया गेट) पर पुष्प अर्पित करके वीर जवानों को श्रद्धाजली देते हैं। इसके बाद भारत के राष्ट्रपति ध्वजारोहण करते हैं, वायुसेना, थलसेना और नौसेना के जवान आजादी की लड़ाई में शहीद सैनिकों को 21 तोपों की सलामी देते हैं। इसके बाद राष्ट्रगान होता है और वीर चक्र, परमवीर चक्र, अशोक चक्र कए महावीर चक्र और कीर्ति चक्र सहित अन्य आवॉर्ड के विजेताओं को आवॉर्ड दिए जाते हैं। राष्ट्रपति को सलामी देते हुए परेड शुरू होती है और इसमें तोपें, मिसाइलें, हथियार आदि को दिखाया जाता है। स्कूलों के बच्चें रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। जैसे कि आपको पता है कि इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था, तो आपको बता दें कि गणतंत्र भारत के संविधान का मसौदा एक मसौदा समिति ने तैयार किया गया था जिसका नेतृत्व डॉ. बीआर अंबेडकर ने किया था। भारतीय संविधान दुनिया में सबसे लंबा लिखित संविधान है। गणतंत्र दिवस मनाने का एक मुख्य लक्ष्य भारतीय संविधान का सम्मान करना और हमारे देश के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देना है, जिन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान अपनी जान गंवाई है। स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा 26 जनवरी 1950 को राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के बाद भारत में गणतंत्र दिवस को राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया गया था। प्रत्येक वर्ष किसी अन्य देश या राष्ट्र के राष्ट्रपति या प्रधान मंत्री गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होते है। इस वर्ष फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैकों मुख्य अतिथि है। समारोह का सफल संचालन व्याख्याता जीडी गुरू सर ने किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण जन सहित शाला परिवार, पंचायत पदाधिकारीगण उपस्थित थे।