दुर्गम क्षेत्रों में सूरज की रोशनी बुझा रही खेतों की प्यास

 

रायपुर, 10 फरवरी 2023/ फसल की अच्छी पैदावार के लिए उचित देखरेख के साथ पर्याप्त सिंचाई भी जरूरी है। भौगोलिक दृष्टि से पहुंचविहीन और अविद्युतीकृत क्षेत्रों में किसानों के लिए खेतों तक पानी पहुंचाना एक बड़ी समस्या रही है। इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा बड़ी सहूलियत बन कर उभर रही है। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में सैकड़ों किसान सौर सुजला योजना के माध्यम से अपने खेतों में सोलर पंप लगाकर सिंचाई कर रहे हैं। इससे खेतों को भरपूर पानी मिलने लगा है, जिससे उत्पादन भी बढ़ा है। पानी की सुविधा होने से कई किसान खेतों के बीच मछली पालन और अतिरिक्त फसल लेकर अतिरिक्त कमाई भी करने लगे हैं। सौर ऊर्जा से पंप चलने से जहां किसानों को बिजली गुल की समस्या तथा भारी भरकम बिजली बिलों से छुटकारा मिला है, वहीं रात में वाटर रिचार्जिंग का समय मिलने से जमीन का जलस्तर भी नहीं गिरता है।

सुदूर वनाच्छादित दुर्गम स्थलों के किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) द्वारा इन क्षेत्रों में रियायती दर पर किसानों को सोलर पम्प दिए जा रहे हैं। योजना के तहत राज्य सरकार द्वारा 90 प्रतिशत से अधिक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है। 5 हॉर्स पावर का पम्प अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को 10 हजार रूपए, अन्य पिछड़ा वर्ग को 15 हजार रूपए और सामान्य वर्ग को 20 हजार रूपए में प्रदान किये जा रहेे हैं। इसी तरह 3 हॉर्स पावर के पम्प अनुसूचित जाति और जनजाति के किसानों को 7 हजार, अन्य पिछड़ा वर्ग को 12 हजार और सामान्य वर्ग को 18 हजार रूपए में प्रदान किये जाते हैं। अब सूरज की रोशनी खेतों की प्यास बुझाने लगी है, कांकेर जिले में ही योजना के तहत 6 हजार 821 किसानों के खेतों और 268 गौठान चारागाह में 7 हजार 89 पम्प स्थापित किये गए हैं। क्रेडा द्वारा 5 साल तक सोलर पंप का मेंटेनेंस भी किया जाता है। जिससे किसानों के लिए सिंचाई अब आसान हो गई है।