डोंगरगांव : डोंगरगांव में शराब दुकानों के इर्द-गिर्द फल-फूल रही अवैध चखना दुकानों ने न केवल सामाजिक ताने-बाने को कमजोर किया है, बल्कि कानून व्यवस्था और प्रशासनिक सतर्कता पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। शाम ढलते ही चखना दुकानों के पास जाम टकराते हैं, नशे में चूर लोगों की भीड़ सड़कों पर नजर आने लगती है, और यह सब कुछ प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है।
शराब दुकानों के आसपास ऐसी 20 से ज्यादा अवैध चखना दुकानें संचालित हो रही हैं, जहाँ शराब परोसना अब आम बात हो गई है। इन दुकानों पर बैठने की व्यवस्था से लेकर “गिलास में परोसने” तक की सुविधा उपलब्ध है। यह न केवल आबकारी नियमों का उल्लंघन है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सब कुछ आबकारी विभाग की जानकारी में है, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है। कुछ दुकानों को चेतावनी देकर छोड़ दिया जाता है, जबकि अन्य पर नजरें फेर ली जाती हैं। इससे स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं विभाग की मिलीभगत या लापरवाही इस समस्या को बढ़ावा दे रही है।
चखना दुकानों के अलावा, डोंगरगांव के कई होटल और ढाबों में भी शाम ढलते ही शराब परोसी जाती है l बिना लाइसेंस के, खुलेआम शराब की खपत की यह प्रक्रिया न सिर्फ अवैध है बल्कि यह आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी बुरे प्रभाव छोड़ रही है। ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले युवा इन अड्डों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है।नशे की बढ़ती लत से घरों में कलह, अपराध, और घरेलू हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं। स्थानीय लोगो ने कई बार विरोध प्रदर्शन भी किया, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
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देर रात तक लगा रहता है जमावड़ा
चखना देखनो में देर रात तक शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है l रास्ते से गुजरने वाले राहगीरों को अक्सर इनसे खतरा महसूस होता है कई बार नौबत लड़ाई झगड़े तक पहुंच जाती है l इनपर किसी प्रकार का शिकंजा नहीं कसा जा रहा है l यहाँ रातभर पीने पिलाने का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है l लगातार इसकी शिकायत होने के बाद भी आबकारी विभाग की कोई एक्शन मोड में नहीं दिख रहा है l
आबकारी अधिकारी – कुसुमलता झोले
समय समय पर इनपर कार्यवाही की जाती है l
