महापौर जनता आंदोलन से नहीं आपकी सरकार के कर्मों से परेशान हैं-जयंती पटेल

रायपुर/भारतीय जनता पार्टी जिला अध्यक्ष जयंती पटेल ने महापौर एजाज ढेबर द्वारा धरना स्थल हटाने के लिए कलेक्टर से मुलाकात को सिर्फ राजनीतिक नौटंकी करार देते हुए कहा कि महापौर जी जनता आंदोलन से नहीं आपकी सरकार के कर्मों से परेशान हैं। जिला अध्यक्ष ने कहा कि आज महापौर जनता के हितैषी बनने का दिखावा कर रहे हैं । जब यही जनता सप्रे स्कूल से, दानी स्कूल होकर, पुलिस लाइन के पीछे तक जाने वाले रास्ते को बंद करने का विरोध कर रही थी तब भ्रष्टाचार करने के लिए आपने ताकत का इस्तेमाल करते हुए अपनी मनमानी की। आज वहां आपके अविवेक पूर्ण कार्यो के कारण शाम को जाम की स्थिति रहती है और जिस जनता को सुविधा व मनोरंजन उपलब्ध कराने के लिए आपने 7 करोड़ों का फव्वारा लगाया, जनता पूछ रही है कि वह फव्वारा कब प्रारंभ होगा।
जयंती पटेल ने कहा , महापौर की मनमानी से आज पूरा शहर परेशान है। विश्वविद्यालय के आसपास के शैक्षणिक क्षेत्रों में महापौर जी अपने लोगों को बसाने के लिए चौपाटी खुलवा रहे हैं। मालवीय रोड जैसा शहर का सबसे व्यस्ततम बाजार महापौर जी के प्रश्रय में सड़को पर कब्जा के कारण चलने के बजाय घसीट रहा है।
बात चाहे भाठागांव अंतर राज्यीय बस स्टैंड की हो, चाहे शास्त्री बाजार की या शहर का कोई भी बाजार सारा शहर आपके अतिक्रमणकारी करिंदो से परेशान है।
भाजपा शहर जिला अध्यक्ष जयंती पटेल ने कहा कि 15 वर्षों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार रही कभी धरना स्थल पर ऐसी अव्यवस्था की स्थिति नहीं बनी। कभी धरना स्थल इतना जाम नहीं रहा।
उन्होंने मांग की की शासन को चाहिए कि शहर के अंदर उचित स्थान देखकर धरना स्थल का शीघ्र शिफ्ट करें ताकि आम जनता को भी परेशानी ना हो व सरकार के खिलाफ अपनी बात रखने वाले की आवाज भी सरकार के कानों तक पहुंचे।
उन्होंने कहा वास्तव में इन 4 वर्षों में कांग्रेस सरकार ने जनता से किए कोई वादे पूरे नहीं किए। अब जनता अपने से किए वादाखिलाफी का जवाब पूछने सड़कों पर उतर रही है। ऐसा एक भी दिन नहीं जाता जब कोई ना कोई संगठन अपनी मांगों को लेकर धरना स्थल पर ना हो। महापौर जनता की परेशानियों के कारण नहीं बल्कि अपने कांग्रेसी सरकार के खिलाफ उठ रहे जनता की आवाज को दबाने के लिए धरना स्थल हटाने का दिखावा कर रहे हैं। वास्तव में महापौर चाहते हैं कि धरना स्थल शहर के बाहर चला जाए ताकि आंदोलनकारियों की बात जनता तक ना पहुंचे।