70 कैंपों को सेवा केंद्रों में बदलने की पहल, ग्रामीणों को गांव के पास मिल रहीं सरकारी सुविधाएं
जगदलपुर। कभी नक्सल हिंसा और दुर्गम रास्तों के कारण बुनियादी सुविधाओं से दूर रहे बस्तर के गांवों में अब विकास की नई पहल हो रही है। सुरक्षा कैंपों को जनसेवा केंद्र के रूप में विकसित करते हुए पहले चरण में 70 कैंपों को शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा बनाया जा रहा है। यहां ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, डिजिटल सेवाओं, बैंकिंग और कौशल प्रशिक्षण की सुविधाएं मिल रही हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 18 मई 2026 को नेतानार में देश के पहले शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा जन सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया था। अब इस योजना का विस्तार किया जा रहा है। ‘नियद नेल्ला नार’ योजना के जरिए दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं पहुंचाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
एक छत के नीचे कई सुविधाएं
सेवा डेरा में आधार कार्ड, केवाईसी, मोबाइल नंबर लिंक कराने और जन्म, मृत्यु, आय व जाति प्रमाण पत्र जैसी डिजिटल सेवाएं उपलब्ध हैं। बैंक सखी के माध्यम से ग्रामीणों को बैंकिंग सुविधाएं भी मिल रही हैं। इससे छोटे-छोटे कामों के लिए दूर शहरों तक जाने की जरूरत कम हो रही है।
महिला समूहों को मिल रहा रोजगार
नेतानार में गुंडाधुर महिला स्व-सहायता समूह की महिलाएं इमली का प्रसंस्करण कर पल्प तैयार कर रही हैं। पारंपरिक ढेंकी से चावल तैयार करने और सिलाई प्रशिक्षण के जरिए भी महिलाओं की आय बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। समूह की सदस्य लंबी नाग के मुताबिक, इस काम से महिलाएं सालाना एक लाख रुपये तक की आय अर्जित करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
उत्पादों की ब्रांडिंग पर जोर
ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार से जोड़ने के लिए अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन की टीम ने नेतानार पहुंचकर इमली प्रसंस्करण, सिलाई और पारंपरिक ढेंकी के कामों का जायजा लिया। टीम ने उत्पादों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग पर चर्चा की, जिससे स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
सुरक्षा कैंपों का सेवा डेरा में बदलना बस्तर के दूरस्थ गांवों तक सरकारी सुविधाएं पहुंचाने की पहल है। इससे ग्रामीणों, खासकर महिलाओं को स्थानीय स्तर पर सेवाओं और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

