खैरागढ़। जिले के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थल मंढीपखोल में आयोजित होने वाली पारंपरिक देव जात्रा एवं महोत्सव की तैयारियां इस वर्ष भी पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ जोरों पर हैं। यह आयोजन आगामी 5 मई को, अक्षय तृतीया के बाद के पहले सोमवार को पारंपरिक रूप से संपन्न किया जाएगा।

राज परगना के प्रमुख और श्रद्धालुओं की मनोकामना पूर्ण करने वाले भूमालिक मंढीप खोल बाबा की यह देव जात्रा ठाकुरटोला स्थित प्राचीन गुफा स्थल में आयोजित होती है, जिसे खैरागढ़ अंचल की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर के रूप में जाना जाता है।
प्राकृतिक सौंदर्य और रहस्यमयी संरचना से भरपूर यह विशाल गुफा स्थल जंगलों और नदी की कई धाराओं को पार करते हुए पहुँचने पर मिलता है, जो रोमांच और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यह आयोजन क्षेत्र की आदिम सांस्कृतिक परंपराओं, साहसिक यात्रा और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक बन चुका है, जो हर वर्ष हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
गत वर्ष मधुमक्खियों द्वारा श्रद्धालुओं पर हुए हमले की घटना को ध्यान में रखते हुए मंढीपखोल समिति, क्षेत्रवासियों और पूर्व जमींदारी राज ठाकुरटोला के संरक्षकत्व में इस वर्ष सख्त अनुशासनात्मक दिशा-निर्देश लागू किए जा रहे हैं। आयोजन स्थल पर मदिरापान, नशा सेवन और पिकनिक जैसे कार्यों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा, जिससे श्रद्धा और सुरक्षा दोनों का समुचित संतुलन बना रहे।
मंढीपखोल आयोजन समिति के वरिष्ठ सदस्य श्री विनोद ठाकुर ने बताया, “यह स्थल हमारी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। हम चाहते हैं कि श्रद्धालु यहाँ केवल भक्ति और श्रद्धा की भावना से आएँ। सुरक्षा के लिए इस बार विशेष प्रबंधन किया गया है और सभी से अनुरोध है कि नियमों का पालन करें।”
मंढीप खोल महोत्सव, श्रद्धा, संस्कृति और प्रकृति के ताने-बाने से बुना एक अनुपम पर्व है, जो लोगों को अपनी जड़ों से जोड़ने और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरने का कार्य करता है। प्रशासन एवं आयोजन समिति सभी श्रद्धालुओं से सहयोग की अपील करते हैं ताकि यह परंपरा अनुशासन, आस्था और गरिमा के साथ आगे बढ़ सके।
